सोना-चांदी में बड़ी गिरावट का संकेत! क्या आने वाला है निवेशकों के लिए सुनहरा मौका, जानिए एक्सपर्ट की पूरी भविष्यवाणी
हाइलाइट्स
सोना-चांदी कीमत गिरावट को लेकर बाजार विशेषज्ञों ने जताई बड़ी संभावना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
अजय केडिया के अनुसार अगस्त-सितंबर तक सोने और चांदी में बड़ा करेक्शन संभव।
सितंबर के बाद त्योहारी मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से फिर तेजी आ सकती है।
सोना-चांदी कीमत गिरावट की चर्चा ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी
देश और दुनिया के आर्थिक हालात लगातार बदल रहे हैं। ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच सोना-चांदी कीमत गिरावट को लेकर एक बड़ी चर्चा शुरू हो गई है, जिसने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
भारत जैसे देश के लिए यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। इसके अलावा सोना भी उन वस्तुओं में शामिल है जिन पर भारत का भारी विदेशी मुद्रा खर्च होता है। ऐसे में सरकार और आर्थिक विशेषज्ञ दोनों विदेशी मुद्रा बचाने के उपायों पर जोर दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील और विदेशी मुद्रा की चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है। इसका उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना बताया जा रहा है।
भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें ऊंची होती हैं, तब इसका असर सीधे देश के आयात बिल पर पड़ता है। यही कारण है कि सरकार ने सोने पर आयात शुल्क भी बढ़ाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों का असर बाजार में दिखाई देने लगा है और सोने की मांग में कुछ कमी दर्ज की गई है। ऐसे माहौल में सोना-चांदी कीमत गिरावट की संभावना और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अजय केडिया ने क्यों जताई बड़ी गिरावट की आशंका?
इतिहास दोहरा सकता है खुद को
कमोडिटी बाजार के जाने-माने विशेषज्ञ अजय केडिया का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां पिछले बड़े आर्थिक संकटों जैसी दिखाई दे रही हैं।
उनके अनुसार, वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के दौरान भी बाजारों में इसी तरह की अनिश्चितता देखने को मिली थी। उस समय भी निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया था, लेकिन शुरुआती दौर में नकदी की कमी के कारण सोने और चांदी में दबाव देखने को मिला था।
अजय केडिया का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में भी सोना-चांदी कीमत गिरावट की संभावना इसी वजह से मजबूत होती दिखाई दे रही है।
कच्चे तेल की महंगाई बढ़ा रही चिंता
ईरान संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। तेल की कीमतें बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ती है, उत्पादन महंगा होता है और महंगाई में वृद्धि होती है।
जब महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता दोनों बढ़ती हैं, तब कई बार निवेशक नकदी बनाए रखने को प्राथमिकता देते हैं। इसी वजह से सोने और चांदी जैसी परिसंपत्तियों में भी बिकवाली देखने को मिल सकती है।
यही कारण है कि विशेषज्ञ सोना-चांदी कीमत गिरावट की संभावना को गंभीरता से देख रहे हैं।
कितना सस्ता हो सकता है सोना?
सोने में बड़े करेक्शन का अनुमान
अजय केडिया के अनुसार आने वाले महीनों में सोना मौजूदा स्तरों से नीचे आ सकता है। यदि वैश्विक आर्थिक दबाव और लिक्विडिटी संकट गहराता है, तो सोने में उल्लेखनीय गिरावट संभव है।
उन्होंने अनुमान जताया है कि सोना गिरकर लगभग 1.40 लाख रुपये से 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे तक पहुंच सकता है।
यह अनुमान बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि लंबे समय से सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सोना-चांदी कीमत गिरावट का यह दौर अस्थायी हो सकता है।
चांदी में भी आ सकता है दबाव
औद्योगिक मांग के बावजूद गिरावट संभव
चांदी का उपयोग केवल निवेश के लिए ही नहीं बल्कि उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में चांदी की मांग लगातार बनी हुई है।
फिर भी यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आती है तो औद्योगिक मांग प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से चांदी की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि चांदी लगभग 2.20 लाख से 2.25 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक आ सकती है। इस संभावित सोना-चांदी कीमत गिरावट को निवेशक एक अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए क्यों खास हो सकता है यह समय?
खरीदारी का सुनहरा अवसर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगस्त या सितंबर तक सोना-चांदी कीमत गिरावट होती है और कीमतें अनुमानित स्तरों तक पहुंचती हैं, तो यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए शानदार अवसर साबित हो सकता है।
इतिहास बताता है कि बड़े करेक्शन के बाद अक्सर सोना और चांदी मजबूत वापसी करते हैं। जो निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, वे गिरावट के दौर में खरीदारी कर बेहतर रिटर्न हासिल कर सकते हैं।
हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।
सितंबर के बाद क्यों लौट सकती है तेजी?
त्योहारी सीजन देगा समर्थन
भारत में सितंबर के बाद त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है। नवरात्रि, दशहरा, धनतेरस और दीपावली के दौरान सोने और चांदी की मांग पारंपरिक रूप से बढ़ जाती है।
इस बढ़ी हुई मांग का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। यही वजह है कि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना-चांदी कीमत गिरावट के बाद बाजार में तेजी लौट सकती है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी अहम वजह
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। यह प्रवृत्ति पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुई है।
केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को विविध बनाने और जोखिम कम करने के लिए सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं। इससे लंबी अवधि में सोने की कीमतों को मजबूत समर्थन मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की यह खरीदारी भविष्य में सोने को नए रिकॉर्ड स्तरों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
वैश्विक संकट और बाजार की दिशा
दुनिया भर के निवेशकों की नजर इस समय भू-राजनीतिक तनाव, तेल बाजार और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर टिकी हुई है। ईरान संकट, महंगाई और आर्थिक सुस्ती जैसे कारक आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
ऐसे माहौल में सोना-चांदी कीमत गिरावट एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार की चाल, वैश्विक घटनाक्रम और विशेषज्ञों की राय पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
वर्तमान परिस्थितियों में सोना-चांदी कीमत गिरावट की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बढ़ती तेल कीमतें, वैश्विक आर्थिक सुस्ती और नकदी की मांग जैसी वजहें निकट भविष्य में सोने और चांदी पर दबाव बना सकती हैं। हालांकि लंबी अवधि के दृष्टिकोण से सोना और चांदी अभी भी मजबूत निवेश विकल्प माने जा रहे हैं।
यदि विशेषज्ञों के अनुमान सही साबित होते हैं, तो अगस्त-सितंबर के दौरान आने वाली संभावित सोना-चांदी कीमत गिरावट निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर बन सकती है, जबकि सितंबर के बाद त्योहारी मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बाजार में नई तेजी ला सकती है।

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